पशु अधिकार: एक आवाज़ जो अब तक अनसुनी रही
पशुओं के नाम पहला पन्ना
अयोध्या केवल एक नगरी नहीं, यह करुणा, मर्यादा और सह-अस्तित्व का प्रतीक रही है। लेकिन इसी पवित्र भूमि पर हमारे आसपास ऐसे कई जीव हैं, जिनकी पीड़ा अक्सर हमारी आँखों से ओझल रह जाती है — वे जीव जो बोल नहीं सकते, लेकिन दर्द उतना ही महसूस करते हैं जितना हम।
पशु अधिकार कोई नया विचार नहीं है। यह केवल इतना कहता है कि हर जीव को जीने, सुरक्षित रहने और सम्मान के साथ व्यवहार पाने का अधिकार है।
पशु हमारे मनोरंजन, व्यापार या सुविधा की वस्तु नहीं हैं — वे भी इस धरती के समान अधिकार वाले निवासी हैं।
सड़कों पर घायल कुत्ते, दूध के लिए बंधी हुई गायें, बोझ ढोते घोड़े, पिंजरों में कैद पक्षी — ये सभी हमें हर दिन एक सवाल पूछते हैं:
क्या हमारी करुणा केवल मनुष्यों तक सीमित है?
इस के माध्यम से हम यह याद दिलाना चाहते हैं कि
करुणा किसी एक प्रजाति के लिए नहीं होती।
जहाँ अधिकार केवल काग़ज़ों पर नहीं, व्यवहार में दिखने चाहिए।
इस पेज का उद्देश्य क्या है?
इस पेज के माध्यम से हमारा प्रयास होगा:
- पशुओं के अधिकारों और उनकी मूल ज़रूरतों के बारे में जागरूकता फैलाना
- पशुओं के साथ होने वाली चुपचाप स्वीकार की गई क्रूरता पर संवेदनशील संवाद शुरू करना
- लोगों को यह समझाना कि पशुओं की मदद करना कोई “असाधारण काम” नहीं, बल्कि एक मानवीय ज़िम्मेदारी है
- ज़मीन पर हो रहे वास्तविक मामलों, अनुभवों और सच्चाइयों को सामने लाना
- यह संदेश देना कि बदलाव सरकार या संस्थाओं से पहले हमसे शुरू होता है
हम यह नहीं कहते कि हर कोई रेस्क्यू करे,
लेकिन हर कोई इतना तो कर ही सकता है कि
दर्द देखकर नज़र फेर न ले।
अगर यह पेज किसी एक व्यक्ति को भी
थोड़ा और दयालु बना पाए,
तो यह शुरुआत सफल मानी जाएगी।
क्योंकि जब पशुओं को अधिकार मिलते हैं,
तब समाज सच में सभ्य कहलाता है।
— Pragya Gupta
(पशुओं के लिए, संवेदना के साथ)